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D.S ch-3 class 8

पाठ संख्या -3 ( आत्म बोध  कविता  )
प्रश्न-1  अनादि नाद कौन सा है जिसके बारे में विवाद नहीं ?
उत्तर-1   अनादि नाद ओम्  है जिसके बारे में विवाद नहीं |
प्रश्न-2 इस अनादि  नाद को कौन नहीं भूलते ? |
उत्तर-2  वीतराग ,योगी ,एवं पूज्यनीय  लोग नही भूलते |
प्रश्न-3    वेद को प्रमाण मानने वाले किसका गान करते हैं ?
उत्तर-3    वेद को प्रमाण मानने वाले ओ३म्  का गान करते हैं |
प्रश्न-4   उस नाद का त्याग कौन करते हैं ?
उत्तर-4  उस नाद का त्याग पापी,रोगी, कमजोर व्यक्ति , एवं आलसी करतें हैं |
प्रश्न-5   मुक्ति पाने का साधन यहाँ क्या बतलाया गया है ?
उत्तर-5  मुक्ति पाने का साधन यहाँ ओ३म् नाम का जाप आदि करना ,  शंकर आदि पवित्र नामों का नित्य  जाप करना बतलाया गया है | “शंकर आदि नित्य नाम जो ------“ |
प्रश्न -6  ओ३म् का जप ध्यान आदि कौन करतें हैं ?
उत्तर-6ओ३म् का जप ध्यान आदि साधू,सन्यासी, विरक्त-सुभक्त लोग नित्यप्रति करते है |         “ध्यान में धरें विरक्त भाव से --------ओ३म् अनेक --------“ |
 ध्यान देने योग्य: –इस पाठ के उत्तर लिखते समय कोटेशन अवश्य लिखें  |  


D.s. Ch-2 class 8

पाठ संख्या-2 (ओ३म् की महिमा )
प्रश्न -1  भगवान् का सर्वश्रेष्ठ नाम क्या है ?
उत्तर-1 भगवान् का सर्वश्रेष्ठ नाम  ओ३म् है |”है यही अनादी नाद निर्विकल्प निर्विवाद “|
प्रश्न-2    वाणी में पवित्रता किसके जाप से आती है ?
उत्तर-2  वाणी में पवित्रता ओ३म्  नाम के जाप से आती है |
प्रश्न-3    जगत का अनुपम आधार कौन है ?
उत्तर-3   जगत का अनुपम आधार ओ३म् है |

प्रश्न-4 मन मन्दिर की ज्योति का प्रकाश पुंज कौन है ?
उत्तर-4 मन मन्दिर की ज्योति का प्रकाश पुंज ओ३म् है |
प्रश्न-5   ओ३म् नाम को प्राप्त कर लेने पर मनुष्य की कैसी निष्ठा बन जाती है ?मगन  हो जाता है |
उत्तर--5   ओ३म् नाम को प्राप्त कर लेने पर मनुष्य की एसी निष्ठा बन जाती है कि-वह लाख को छोड़ कर ओ३म् नाम के जाप में मगन  हो जाता है |
प्रश्न -6       ओ३म् शब्द की व्याख्या कीजिए
उत्तर-6                    ओ३म् नाम सबसे बड़ा इससे बड़ा ना कोय  |
                              जो इसका सुमिरन करे शुद्ध आत्मा होय || 
 ईश्वर नें सारी सृष्टि को बनाया है | वही इसका पालन करता है और अन्त  में समेट लेता है |  ओ३म् शब्द में तीन अक्षर है अ उ और म | ये तीन अक्षर ही तो सृष्टि के आदि मध्य और अन्त  के द्योतक हैं | यही ओम् सबका प्राण है | सृष्टि का सबसे पहला नाद ओ३म् था | मानव का यही आदि  मध्य अन्त है | यही  परमेश्वर का उसका अपना निज नाम और सर्वोत्तम नाम है |
प्रश्न -7 गुरु नानकदेव जी नें ओम् के विषय में क्या कहा है ?
उत्तर-7  श्री गुरू नानक देव नें ओम् के विषय में कहा है कि- 
“ एक ओंकार सत् नाम कर्ता पुरख “ = अर्थात् ओम् और ओंकार दोनों का तात्पर्य एक  है |

प्रश्न-8 ओ३म् नाम का महत्व स्पष्ट कीजिए ?
उत्तर-8  ओ३म् नाम सर्वानन्द निधान करते वेद बखान | ओ३म् नाम के जाप से मनुष्य धर्म अर्थ काम और मोक्ष का स्वामी बन जाता है | वाणी में पवित्रता आती है | ओम् के जाप से मनुष्य की सभी कामनाएँ पूर्ण हो जाती है | ओम् ही तो सारे जगत का आधार है | ओम् नाम के जाप से रसना रसीली हो जाती है | ओम् नाम का जाप करने वाला मनुष्य जीवन में कभी भी निराश नहीं होता है | निश्चित रूप से ओ३म् का मानसिक जाप हृदय में ज्योति प्रकट करता है | कहा भी गया है –“ जबहिं नाम हृदय धर् यो भयो पापको नाश  जैसे चिनगी आग की पड़ी पुरानी घास ” ||

D.s. Ch-1 class 8


पाठ -1 (ओ३म् ध्वज गीत )
प्रश्न -1 “ जयति ओ३म् ध्वज व्योमविहारी ”  गीत किस झण्डे के फहराने
              पर बोला जाता है ?
 उत्तर-1  “ जयति ओ३म् ध्वज व्योम विहारी “ गीत ओ३म् के झण्डे को
         फहराने पर बोला जाता है |
प्रश्न - 2 साम्य सुमन विकसाने  वाला “ का क्या तात्पर्य है  ?
उत्तर -2 “ साम्य सुमन विकसाने  वाला ” का तात्पर्य है कि – समानता रुपी पुष्पों को विकसाने वाला  अर्थात्  परमात्मा | परमात्मा से तात्पर्य  ओ३म् | परमात्मा की नजरों में सब समान हैं |     “ साम्य सुमन विकसाने वाला विश्व विमोहक भवभय हारी........... ”  |
प्रश्न-3 “ इसके ”शब्द का अर्थ यहाँ क्या है |
उत्तर 3  “ इसके “ शब्द का अर्थ यहाँ  ओ३म्  है |  इसके नीचे बढे अभय मन.......”  |


प्रश्न -4 वेद ज्ञान के घर-घर में भर जाने से क्या लाभ होगा ?
उत्तर -4 वेद ज्ञान के घर-घर में भर जाने से यह लाभ होगा कि – सारे संसार के घरों से अविद्या रुपी= अज्ञानता का  अन्धकार  मिट जाएगा  और कल्याण करने वाली शान्ति फैलेगी | सबका कल्याण होगा |
प्रश्न  -5 आर्य जनों का अटल निश्चय क्या होना चाहिए ? 
उत्तर -5 आर्य जनों का अटल निश्चय  सारी  पृथ्वी के लोगों को आर्य बनाना होना चाहिए  |  आर्य= अर्थात् श्रेष्ठ या उत्तम समाज का निर्माण करना | 
“ आर्य जनों का ध्रुव निश्चय हो -आर्य बनावें वसुधा सारी ”

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